नीतीश को साधने के लिए शरद से मुफीद कोई नहीं है .

 

 

 

आलोक कुमार ,

(वरिष्ठ पत्रकार व् विश्लेषक ), पटना

 

मेरी राय में ” अगर शरद यादव नयी पार्टी बनाने का ऐलान करते हैं तो अवश्य ही शरद जेडीयू को तोड़ेंगे …. बिना पार्टी तोड़े नयी पार्टी बनाने का कोई व्यावहारिक औचित्य भी नहीं दिखता …. अपनी सार्थकता व् उपयोगिता साबित करने के लिए शरद यादव को नीतीश जी की जेबी पार्टी को तोड़ना ही होगा …भले ही संख्या निश्चित न हो ….. शरद यादव जैसा मंजा हुआ खिलाड़ी बिना सेंध लगाए ऐसी गलती करेगा भी नहीं ….. पर्दे के पीछे क़ी राजनीति में एक ही प्रयोजन के लिए अनेकों चूल्हों पर अनेकों खिचड़ियाँ पक रही होती हैं और सब क़ी रेसेपी भी भिन्न होती है ….. कोई आश्चर्य नहीं कि शरद जिस खिचड़ी को पका रहे हों उसके ईंधन , उसकी सामग्री क़ी सप्लाई भी भाजपा क़ी ओर से ही हो रही हो …!!

 

” इस में कोई शक नहीं क़ी आज क़ी तारीख में नीतीश कुमार को साधने , कट – टू – साईज़ करने के लिए के लिए शरद यादव से ज्यादा मुफीद कोई और नहीं है …. और ‘नीतीश को साधने के भाजपा के प्लान का हिस्सा हों शरद’ इसे सिरे से ख़ारिज भी भी नहीं किया जा सकता ….. शरद यादव के लिए व्यक्तिगत रूप में महागठबंधन व् विपक्ष क़ी गोलबंदी से कोई बहुत बड़ा फायदा होते हुए भी नहीं दिखता …. यहाँ गौर करने वाली बात ये भी है कि शरद यादव को नीतीश कुमार के साथ कुछ ‘पर्सनल – स्कोर्स’ भी सेटल करने हैं और शरद ये मौका चूकना नहीं चाहेंगे …. भाजपा शरद यादव का इस्तेमाल कर नीतीश को ‘टेम’ भी करना चाहेगी और ऐसा करने के तोहमत से भी खुद को बचा लेगी …… वैसे भी मोदी – शाह क़ी जोड़ी अप्रत्याशित दांव चलने के लिए ही जानी जा रही है ….. ” वैसे कहा तो जाता है कि राजनीति संभावनाओं का खेल है लेकिन हाल के दिनों में भाजपा ये साबित करते हुए दिख रही है कि ” चुनौती देने वालों या जिनसे भविष्य में भी चुनौती क़ी कोई उम्मीद हो उनका सिरे से ख़ात्मा ही राजनीति है और भविष्य के किसी भी संभावित समीकरण की पटकथा – पृष्टभूमि भी आज ही तैयार हो तो बेहतर “

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