” औरों को नसीहत ,खुद मियाँ फजीहत “…..

 

 

आलोक कुमार ,

(वरिष्ठ पत्रकार व् विश्लेषक ), पटना

 

सृजन घोटाला बिहार के मुख्यमंत्री व् उनके सिपहसालार सुशील मोदी जी के गले की फांस बनता जा रहा है …. इस घोटाले के सन्दर्भ में विपक्ष के द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर मुख्यमंत्री जी तो लगभग मौन ही हैं और स्वभाव से वाचाल सुशील मोदी जी बोल तो रहे हैं लेकिन ऐसा कोई तार्किक उत्तर नहीं दे पा रहे जिससे ये साबित हो कि इस घोटाले में उनकी कोई संलिप्तत्ता नहीं है ? …..

वैसे तो नीतीश जी की ये पुरानी आदत है कि जब किसी मुद्दे – मामले में वो फंसते नजर आते हैं या बैकफुट पर होते हैं तो चुप्पी साध लेते हैं ….. सरकारी खजाने के दुरूपयोग का देश का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है सृजन और जिनकी सरपरस्ती की सरकार व् विभाग की अनदेखी के कारण लगभग एक दशक तक ये अनवरत जारी रहा ऐसे लोग क्या मौन रह कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकते हैं ? गवर्नेंस का कैसा फार्मूला है ये ? कैसी ट्रांसपेरेंसी है ये ? कैसी शुचिता है ये ? ….. विपक्ष नीतीश – सुशील की जोड़ी पर सीधे आरोप लगा रहा है , आम जनता में भी संशय कायम है , मीडिया का एक बड़ा धड़ा भी इस घोटाले के सन्दर्भ में इन दोनों की भूमिका पर प्रश्न – चिन्ह (?) लगाता दिखता है ….. ऐसे में क्या इन दोनों की अंतरात्मा की आवाज कभी ये नहीं कहती कि ” घोटाले की जाँच पूरी होने तक अपने पद का त्याग कर आरोप गलत साबित होने का इंतजार करो ?” …… ऐसी दुहाई दूसरों को पूर्व में ये जोड़ी अनेकों दफा दे चुकी है … ‘ पर उपदेश कुशल बहुतेरे ‘ की जीवंत मिसाल है ये जोड़ी ….. वैसे भी जिस पर आरोप लग रहा है अगर वो ही सत्ता के शीर्ष पर बैठ कर जाँच की कमान संभालेगा तो सच्चाई क्या खाक निकल कर आएगी ? …… इन जैसों के लिए ही कहा गया है ” औरों को नसीहत ,खुद मियाँ फजीहत “….. 

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